हिमालय क्या है और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? परिचय :- भारत के उत्तरी छोर पर एक ऐसी पर्वत श्रृंखला खड़ी है जो न सिर्फ दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों का घर है, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं हिमालय की। संस्कृत में "हिम" यानी बर्फ और "आलय" यानी घर — यानी हिमालय का शाब्दिक अर्थ है "बर्फ का घर"। यह विशाल पर्वतमाला करीब 2,400 किलोमीटर लंबी है और भारत, नेपाल, भूटान, चीन (तिब्बत) और पाकिस्तान जैसे पांच देशों में फैली हुई है। लेकिन हिमालय सिर्फ एक भौगोलिक संरचना भर नहीं है। यह भारतीय उपमहाद्वीप की जलवायु, जल आपूर्ति, कृषि, अर्थव्यवस्था और संस्कृति की रीढ़ है। अगर हिमालय न होता, तो शायद भारत का भूगोल, मौसम और यहां तक कि इतिहास भी बिल्कुल अलग होता। आइए विस्तार से समझते हैं कि हिमालय आखिर है क्या, यह कैसे बना, इसके कितने हिस्से हैं और यह हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है। हिमालय का निर्माण कैसे हुआ ? हिमालय की कहानी शुरू होती है आज से लगभग 5 करोड़ साल पहले। उस समय भारतीय भूभाग एक अलग टेक्टोनिक प्लेट...
परिचय:- हिमालय की ऊंची चोटियों पर चमकती सफेद बर्फ की चादरें सिर्फ एक खूबसूरत नजारा भर नहीं हैं — ये असल में करोड़ों लोगों की जीवनरेखा हैं। इन्हीं बर्फ की विशाल परतों को हम ग्लेशियर या हिमनद कहते हैं। लेकिन पिछले कुछ दशकों में यही ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, और वैज्ञानिक इसे लेकर लगातार चेतावनी दे रहे हैं। आखिर ग्लेशियर होता क्या है, यह बनता कैसे है, और यह इतनी तेजी से पिघल क्यों रहा है? आइए इस लेख में इसे विस्तार से समझते हैं। ग्लेशियर क्या होता है और ग्लेशियर कैसे पिघलते हैं ग्लेशियर क्या होता है? ग्लेशियर बर्फ का एक विशाल और घना समूह है, जो सैकड़ों-हजारों सालों तक जमा होती बर्फ से बनता है और अपने ही वजन के कारण बेहद धीमी गति से खिसकता रहता है। सामान्य बर्फ और ग्लेशियर में सबसे बड़ा फर्क यही है कि ग्लेशियर लगातार गति करता है, भले ही यह गति हर साल कुछ सेंटीमीटर से लेकर कुछ मीटर तक ही क्यों न हो। दुनिया में ग्लेशियर मुख्य रूप से ध्रुवीय क्षेत्रों (उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव) और ऊंचे पर्वतीय इलाकों जैसे हिमालय, आल्प्स और एंडीज में पाए जाते हैं। हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र, जो अफ...